झुका है सर बंदगी में..इंसान हूँ..
खुले हाथ आसमान हूँ...
उठे जब चेहरा आफताब हूँ..
मैं इंसान हूँ.
अभी तक चुप हूँ न समझो खो गया..
आँख बंद है, न समझो सो गया
बन रही योजना युग का पुनर्निर्माण हूँ
मैं एक इंसान हूँ.
उम्मीद हूँ तर्क हूँ सतर्क हूँ
आस्था और धर्म हूँ
अन्धकार मिटाने को जल रही मशाल हूँ ..मैं इंसान हूँ
Wednesday, December 12, 2007
Monday, September 10, 2007
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